संदेश भारत, रायपुर। हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को देशभर में विजयादशमी अथवा दशहरा पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की थी। इसी उपलक्ष्य में आज भी पूरे भारत में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है।
रावण दहन कब होता है?
दशहरा नवरात्र के नौ दिनों की आराधना के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को आता है। इस दिन शाम के समय, प्रदोषकाल में, बड़े-बड़े मैदानों और मेले-उत्सवों में रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
रावण दहन क्यों किया जाता है?
रावण दहन का संबंध केवल रामायण की कथा से ही नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश से भी है।
1. धर्म की स्थापना - रावण शक्ति और विद्या का धनी होने के बावजूद अहंकार, अत्याचार और अधर्म का प्रतीक बन गया था। श्रीराम ने धर्म की रक्षा और सीता माता की रक्षा हेतु उसका वध किया।
2. सत्य की विजय - रावण दहन यह बताता है कि चाहे बुराई कितनी भी बलवान क्यों न हो, अंततः पराजित होती है और सत्य की ही विजय होती है।
3. आत्मशुद्धि का संदेश - यह आयोजन लोगों को यह याद दिलाता है कि हर इंसान के भीतर भी रावण जैसे दोष – अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और कामना मौजूद होते हैं। दशहरे पर रावण दहन इन्हीं नकारात्मकताओं को जलाने का प्रतीक है।
4. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व - रावण दहन के आयोजन से समाज में एकता और भाईचारे का संदेश मिलता है। मेले और रामलीला जैसी परंपराएँ समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का काम करती हैं।
भारत में रावण दहन की परंपरा
उत्तर और मध्य भारत (दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ ): यहाँ बड़े-बड़े मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले बनाए जाते हैं और आतिशबाजी के बीच जलाए जाते हैं।
महाराष्ट्र: यहाँ दशहरे पर "अपनापन और भाईचारे" का विशेष महत्व है, लोग एक-दूसरे को "आभूषण स्वरूप अपराजिता के पत्ते" भेंट करते हैं।
दक्षिण भारत: कई जगहों पर रावण दहन न होकर केवल रामलीला और विजयादशमी की पूजा होती है।
पश्चिम बंगाल: यहाँ नवरात्र और दशहरे के मौके पर दुर्गा पूजा का विशेष आयोजन होता है। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।
रावण दहन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संदेश है। यह हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, धर्म, सत्य और न्याय की जीत निश्चित है। समाज को बुराइयों से मुक्त करने और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान है।
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