संदेश भारत, बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम करेली से एक गंभीर मामला सामने आया है। गाँव का वह खेल मैदान, जिसने अब तक कई युवाओं को पुलिस, सेना और अन्य सेवाओं में पहुँचाया, आज अवैध कब्जे की चपेट में है। ग्रामीणों में इसको लेकर गहरा आक्रोश है और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
देश के सिपाही तैयार करने वाला मैदान अब विवाद में
ग्राम करेली का यह खेल मैदान वर्षों से युवाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों का केंद्र रहा है।
इसी मैदान से अब तक — 4 पुलिसकर्मी, 1 जेल प्रहरी, 1 भारतीय नौसेना का जवान, 1 भारतीय सेना का जवान, 1 नगर सैनिक, 1 सीमा तिब्बत पुलिस (ITBP) का जवान — प्रशिक्षण लेकर देश सेवा के लिए निकले हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यही मैदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सपनों की शुरुआत है, लेकिन अब कुछ लोगों द्वारा इस भूमि पर अवैध निर्माण और कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं।
प्रधानमंत्री योजनाओं से जुड़ी भूमि, फिर भी कब्जा?
यहाँ मनरेगा के तहत वृक्षारोपण कार्य भी हुआ है।इसके बावजूद भी अब इस भूमि को निजी उपयोग में लेने की कोशिश की जा रही है, जो कि प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
रेकॉर्ड में शासकीय भूमि, फिर भी कार्रवाई नहीं
फिर भी इस पर कब्जा किए जाने के प्रयास लगातार जारी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी: “मैदान बचाओ, नहीं तो आंदोलन होगा”
जानकारी के अनुसार, इस मैदान से प्रधानमंत्री सड़क योजना और प्रधानमंत्री नल-जल योजना का कार्य संचालित है। ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 197 की यह भूमि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। गाँव के लोगों ने स्पष्ट कहा है कि अगर सरकार ने इस भूमि को सुरक्षित नहीं किया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
“हमारे बच्चों ने इसी मैदान से देश सेवा कीराह पकड़ी है। इसे कब्जे में जाने नहीं देंगे।”— एक ग्रामीण, ग्राम करेली
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब मैदान रेकॉर्ड में सरकारी है, तो कब्जा करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? लोगों ने तहसील और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
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