संदेश भारत रायपुर।छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के विस्तार, नए विश्वविद्यालयों और यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट के गठन की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक मजबूती तभी संभव है, जब विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी सम्मानजनक एवं सुरक्षित सेवा परिस्थितियां उपलब्ध हों।
प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में पीएचडी, नेट, सेट एवं अन्य उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अतिथि व्याख्याता वर्षों से विद्यार्थियों को अध्यापन, प्रायोगिक कार्य, शोध मार्गदर्शन तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद इन शिक्षकों की सेवा व्यवस्था आज भी अस्थायी और अनिश्चित बनी हुई है।
यह स्थिति केवल शिक्षकों के आर्थिक हित का विषय नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ प्रश्न है।
अतिथि व्याख्याता नहीं, योग्य अकादमिक शिक्षक हैं
जिन अतिथि व्याख्याताओं के पास पीएचडी, नेट, सेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक योग्यताएं हैं, उनसे विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों के समान अकादमिक दायित्वों का निर्वहन कराया जाता है। वे कक्षाएं लेते हैं, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं, प्रायोगिक कार्य कराते हैं, परीक्षा संबंधी कार्य करते हैं तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में योगदान देते हैं।
ऐसे में उनकी सेवाओं को केवल अल्पकालीन अथवा अस्थायी व्यवस्था के रूप में देखना उच्च शिक्षा की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
अतिथि व्याख्याताओं के स्थान पर हो “सहायक प्राध्यापक (संविदा)” नामकरण
उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले तथा लंबे समय से विश्वविद्यालयों में अध्यापन कर रहे अतिथि व्याख्याताओं को केवल “अतिथि व्याख्याता” के रूप में संबोधित करना उनकी वास्तविक अकादमिक भूमिका और योग्यता के अनुरूप नहीं है।
अतः प्रदेश में ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसके अंतर्गत पात्र एवं योग्य अतिथि व्याख्याताओं को “सहायक प्राध्यापक (संविदा)” के नाम से जाना जाए। यह नामकरण केवल पदनाम में परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि इससे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, जिम्मेदारियों और विश्वविद्यालय में उनके वास्तविक योगदान को उचित सम्मान मिलेगा।
साथ ही, इस संविदात्मक पद के अनुरूप स्पष्ट सेवा शर्तें, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, सम्मानजनक मानदेय और सेवा की निरंतरता का प्रावधान किया जाना चाहिए।
सहायक प्राध्यापक (संविदा) के अनुरूप हो मानदेय
अतिथि व्याख्याताओं के लिए अब ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें योग्य शिक्षकों को सहायक प्राध्यापक (संविदा) के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय प्रदान किया जाए।
UGC के Academic Level-10 में सहायक प्राध्यापक का प्रारंभिक मूल वेतन ₹57,700 निर्धारित है।
अतः प्रदेश में उच्च योग्यता रखने वाले अतिथि व्याख्याताओं के लिए भी ₹57,700 के प्रारंभिक मूल वेतन के समकक्ष मानदेय को आधार बनाकर एक सम्मानजनक संविदात्मक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इसके साथ नियमानुसार अन्य अनुमन्य सुविधाओं पर भी शासन को सकारात्मक रूप से विचार करना चाहिए।
इससे शिक्षकों को केवल आर्थिक राहत ही नहीं मिलेगी, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका और गरिमा भी सुनिश्चित होगी।
UGC मानकों के अनुरूप बने स्पष्ट नीति
UGC स्वयं उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षणिक मानकों से संबंधित नियम एवं दिशानिर्देश जारी करता है।
इसलिए छत्तीसगढ़ में भी अतिथि व्याख्याताओं के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और दीर्घकालिक नीति बनाई जानी चाहिए, जिसमें योग्यता, अनुभव, सेवाकाल और अकादमिक योगदान को उचित महत्व दिया जाए।
विशेष रूप से लंबे समय से विश्वविद्यालयों में सेवाएं दे रहे योग्य अतिथि व्याख्याताओं के लिए सेवा की निरंतरता, सम्मानजनक मानदेय, समय पर भुगतान तथा भविष्य की नियुक्तियों में अनुभव का उचित लाभ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उच्च शिक्षा मजबूत करनी है तो शिक्षकों को मजबूत करना होगा
आज छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के सामने सबसे बड़ा प्रश्न केवल नए भवन और नए विभाग खोलने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि उन विभागों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को किस प्रकार की सेवा परिस्थितियां दी जा रही हैं।
यदि कोई शिक्षक उच्च योग्यता प्राप्त करने के बाद वर्षों तक विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है, लेकिन उसे हर वर्ष अपनी सेवा को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो यह व्यवस्था शिक्षक के साथ-साथ पूरी उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए चिंता का विषय है।
सरकार को अतिथि व्याख्याताओं को अस्थायी व्यवस्था के रूप में देखने के बजाय उन्हें उच्च शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अकादमिक मानव संसाधन के रूप में स्वीकार करना चाहिए और पात्र शिक्षकों को सहायक प्राध्यापक (संविदा) के रूप में व्यवस्थित किया जाना चाहिए।
प्रमुख मांगे
अतिथि व्याख्याताओं की ओर से मांग की गई है कि,
1. अतिथि व्याख्याताओं के स्थान पर पात्र एवं योग्य शिक्षकों को “सहायक प्राध्यापक (संविदा)” के नाम से जाना जाए।
2. सहायक प्राध्यापक (संविदा) के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय निर्धारित किया जाए।
3. मानदेय निर्धारण में UGC Academic Level-10 के ₹57,700 प्रारंभिक मूल वेतन को आधार बनाया जाए।
4. नियमानुसार अन्य अनुमन्य सुविधाओं का प्रावधान किया जाए।
5. मानदेय का हर माह समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
6. लंबे समय से कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव और सेवाकाल को भविष्य की नियुक्तियों में उचित महत्व दिया जाए।
7. विश्वविद्यालयों में रिक्त नियमित पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
8. योग्य शिक्षकों के लिए सेवा की निरंतरता और पारदर्शी संविदा नीति लागू की जाए।
9. पीएचडी, नेट, सेट एवं अन्य उच्च योग्यताधारी शिक्षकों के लिए उनकी योग्यता और अकादमिक अनुभव के अनुरूप सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उच्च शिक्षा केवल भवनों और पाठ्यक्रमों से नहीं, बल्कि योग्य और सम्मानित शिक्षकों से मजबूत होती है। छत्तीसगढ़ सरकार को अब अतिथि व्याख्याताओं की वर्षों पुरानी अस्थिरता को समाप्त करते हुए ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें योग्य शिक्षकों को उनके शैक्षणिक स्तर, योग्यता और योगदान के अनुरूप “सहायक प्राध्यापक (संविदा)” के रूप में सम्मानजनक पहचान, उचित मानदेय तथा सेवा की निरंतरता प्राप्त हो।
सवाल केवल अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा के भविष्य का है।
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