मुख्यमंत्री साय ने कांवड़ यात्रा में शामिल हजारों शिवभक्तों का अभिवादन करते हुए सावन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और भक्ति का विशेष समय होता है। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि गुढ़ियारी से हजारों कांवड़िए पवित्र जल लेकर महादेव घाट स्थित भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर के लिए रवाना हुए। श्रद्धालुओं के "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर छत्तीसगढ़ की प्राचीन शिव आराधना परंपरा का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता और लोक संस्कृति से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं से भी है। प्रदेश के प्राचीन शिवधाम, शक्तिपीठ और धार्मिक स्थल हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इनका संरक्षण और विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के विकास, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, महापौर मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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