संदेश भारत कवर्धा। देश 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के एक आदिवासी गांव में आज भी लोग स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। ग्राम पंचायत राजाढार के आश्रित ग्राम बेलापानी में रहने वाले करीब 35 बैगा परिवार बरसात के दौरान दूषित और मटमैला नदी का पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्वच्छ पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। महिलाएं और बच्चे रोजाना नदी से पानी भरकर लाते हैं। बरसात के समय नदी का पानी और अधिक गंदा हो जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला प्रशासन से कई बार हैंडपंप लगाने और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तक भी पहुंचाई, लेकिन अब तक न हैंडपंप लगाया गया और न ही कोई स्थायी समाधान किया गया।
गांव के लोगों का कहना है कि दूषित पानी पीने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। यदि गंदा पानी पीने से किसी की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हैंडपंप लगाने और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई, तो बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है।
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