मरवाही में फिर हाथियों का आतंक, गांवों में दहशत; निगरानी और मुनादी के बीच स्थायी समाधान पर सवाल

मरवाही में फिर हाथियों का आतंक, गांवों में दहशत; निगरानी और मुनादी के बीच स्थायी समाधान पर सवाल

संदेश भारत , मरवाही। बारिश के साथ मरवाही वन क्षेत्र में एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की चिंता बढ़ गई है। तीन हाथियों का दल अलग-अलग गांवों के आसपास घूम रहा है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है। ताजा मामला दर्रीटोला गांव का है, जहां हाथियों की मौजूदगी की सूचना के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ है।


हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है और संभावित खतरे वाले इलाकों में मुनादी भी कराई जा रही है।

लेकिन सवाल यह है कि हर बार हाथियों के गांवों तक पहुंचने के बाद निगरानी और मुनादी तक सीमित रहने वाली व्यवस्था आखिर कब बदलेगी?


पिछले कई वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए अलग-अलग योजनाओं और उपायों पर काम होने का दावा किया जाता रहा है। इसके बावजूद मरवाही क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही, फसलों को नुकसान और ग्रामीणों में डर की स्थिति बार-बार सामने आ रही है।

ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ हाथियों के गांव में आने तक सीमित नहीं है। खेती और रोजमर्रा के काम के लिए जंगल से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने हर बार अपनी सुरक्षा की चिंता खड़ी हो जाती है।

अब जरूरत केवल हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने या गांव में मुनादी कराने की नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक रणनीति बनाने की है जिससे जंगल और बस्तियों के बीच टकराव को कम किया जा सके।

बड़ा सवाल यही है—अगर वर्षों से इस समस्या पर योजनाएं और करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात कही जाती रही है, तो फिर जमीन पर इसका स्थायी असर क्यों नजर नहीं आ रहा?

वन विभाग और प्रशासन के सामने चुनौती साफ है—हाथियों की भी सुरक्षा हो और ग्रामीणों की जान-माल भी सुरक्षित रहे।

Author Praveen dewangan
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