खेल अंतिम क्षण तक लड़ने का साहस देता है : प्रो. दयाल

खेल अंतिम क्षण तक लड़ने का साहस देता है : प्रो. दयाल

रायपुर, 29 अगस्त : खेल केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विपरीत परिस्थितियों में अंतिम क्षण तक संघर्ष कर जीत हासिल करने की अदम्य क्षमता का निर्माण करता है।


उक्त उद्गार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खेलों से खेल भावना, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, साहस, धैर्य, उत्साह, सकारात्मकता और आपसी समन्वय जैसे गुणों का विकास होता है, जो व्यक्तित्व के संतुलित एवं बहुआयामी विकास में सहायक सिद्ध होते हैं और तनाव मुक्त जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रांगण में पारंपरिक एवं नवाचारी खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें ओंकार दौड़, केंद्र कबड्डी, नेताजी की पहचान, मत चूको चौहान, शेर-आदमी-बंदूक और सुदर्शन चक्र प्रमुख रहे।


कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दयाल सहित कुलसचिव सुनील शर्मा, विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

Author Praveen dewangan
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