भारतीय युवा संसद में छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति ने बढ़ाया प्रदेश का मान

भारतीय युवा संसद में छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति ने बढ़ाया प्रदेश का मान

राष्ट्रीय मंच पर विचारों से लेकर कर्मा की थाप तक दिखी छत्तीसगढ़ की पहचान, सदन में बार-बार गूंजा प्रदेश का नाम

संदेश भारत रायपुर/जयपुर। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर 15 से 17 सितंबर 2026 तक जयपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद के 31वें राष्ट्रीय अधिवेशन में छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभा ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई। देश के 24 राज्यों से करीब 400 युवाओं की सहभागिता वाले इस अधिवेशन का विषय “Achieving Gender Equality, Action by Action” रहा। इसमें कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के चार विद्यार्थियों—अर्पित जकर्याह, प्रणय सिंह राजपूत, विप्रांशी पाठक एवं स्वस्तिका राठौर—ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।


यह सहभागिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल एवं विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और विचारों को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बनी।

राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिनिधियों ने BRICS, De-dollarization, महिला सशक्तिकरण, अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और युवा भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान सदन में विभिन्न संदर्भों में छत्तीसगढ़ का नाम बार-बार सामने आया, जिससे राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की युवा आवाज और पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

विचारों के साथ संस्कृति की भी मजबूत उपस्थिति

अधिवेशन में विप्रांशी पाठक एवं स्वस्तिका राठौर ने कर्मा नृत्य की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत की प्रभावी झलक प्रस्तुत की। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों के बीच इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।


एक ओर प्रदेश के युवाओं ने राष्ट्रीय एवं वैश्विक विषयों पर अपने विचार रखे, वहीं दूसरी ओर कर्मा नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान भी सामने आई। इस तरह अधिवेशन में विचार और संस्कृति—दोनों स्तरों पर छत्तीसगढ़ की उपस्थिति दर्ज हुई।


सदन में बार-बार लिया गया छत्तीसगढ़ का नाम

भारतीय युवा संसद के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के चलते सदन में प्रदेश का उल्लेख कई बार हुआ। राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर छत्तीसगढ़ के युवाओं की उपस्थिति और उनके विचारों की चर्चा प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रही।


इससे छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने का अवसर मिला और प्रदेश की पहचान भी व्यापक मंच पर सामने आई।

संविधान की पुस्तक लेकर लौट रहे युवा प्रतिनिधि

भारतीय युवा संसद में सहभागिता के बाद छत्तीसगढ़ से गए सभी विद्यार्थी भारतीय संविधान की पुस्तक लेकर लौट रहे हैं। यह उनके लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने और उन्हें जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा का प्रतीक है।

राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से संविधान की पुस्तक के साथ लौटना विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव है, जो उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के प्रति और अधिक जागरूक करने में सहायक होगा।

विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय मंच तक पहुंची प्रतिभा

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इस उपलब्धि के पीछे कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल के मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय के शिक्षकों के निरंतर सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने विचार-विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

विश्वविद्यालय के लिए भी यह सहभागिता महत्वपूर्ण रही, क्योंकि पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संवाद, सार्वजनिक मंच, विचार अभिव्यक्ति और मीडिया कवरेज का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

छत्तीसगढ़ में भी हों ऐसे राष्ट्रीय आयोजन

जयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय अधिवेशन के अनुभव के बाद छत्तीसगढ़ के युवाओं की ओर से प्रदेश में भी ऐसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन कराए जाने की अपेक्षा सामने आई है।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से अपील की गई है कि प्रदेश में भी भारतीय युवा संसद जैसे राष्ट्रीय युवा संवाद, लोकतांत्रिक विमर्श एवं सांस्कृतिक आयोजनों की मेजबानी की दिशा में पहल की जाए।

ऐसे आयोजनों से देशभर के युवाओं को छत्तीसगढ़ आने और यहां के युवाओं के साथ संवाद करने का अवसर मिलेगा। साथ ही प्रदेश की लोककला, संस्कृति, परंपरा और युवा प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए भी एक बड़ा मंच तैयार होगा।

राष्ट्रीय मंच पर बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान

अधिवेशन में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं राष्ट्रीय स्तर के वक्ता उपस्थित रहे।

ऐसे गरिमामयी मंच पर छत्तीसगढ़ के युवाओं की सक्रिय सहभागिता, सदन में प्रदेश का बार-बार उल्लेख और कर्मा नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने प्रदेश की युवा शक्ति एवं सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा।

कार्यक्रम की मीडिया एवं क्रिएटिव कवरेज Creative Film Club के प्रवीण देवांगन  एवं अमित तिवारी की भूमिका रही। कार्यक्रम से संबंधित कवरेज विश्वविद्यालय की अनुमति एवं समन्वय के साथ किया गया।

भारतीय युवा संसद का यह राष्ट्रीय अधिवेशन छत्तीसगढ़ के लिए युवा प्रतिभा, विचार, संविधान और संस्कृति के राष्ट्रीय मंच पर एक साथ सामने आने का अवसर बना। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल एवं सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की यह सहभागिता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी रही। अब अपेक्षा है कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के युवा आयोजन छत्तीसगढ़ में भी आयोजित हों, ताकि देशभर के युवा यहां आकर प्रदेश की युवा शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

Author Praveen dewangan
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