कोरबा, 9 से 11 अक्टूबर 2026। भविष्य के युद्ध में निशाना केवल सैन्य ठिकाने या पुल ही नहीं, बल्कि बिजली ग्रिड, अस्पतालों के नेटवर्क और जल आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण नागरिक सेवाएं भी हो सकती हैं। इसी गंभीर विषय पर छत्तीसगढ़ के कोरबा में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के सम्मेलन में 12 से अधिक जिलों के 347 से ज्यादा विद्यार्थियों ने चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन न्यू एरा प्रोग्रेसिव स्कूल, कोरबा में किया गया
इस सम्मेलन में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और नेशनल यूथ रिप्रेजेंटेटिव अर्पित जकरियाह को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) समिति की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया गया। उनके नेतृत्व में 42 सदस्यीय समिति के प्रतिनिधियों ने सशस्त्र संघर्ष के दौरान महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमलों के खतरे और उनसे निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
साइबर हमले और नागरिक सुरक्षा पर चर्चा
सम्मेलन की प्रमुख चर्चा इस सवाल पर केंद्रित रही कि साइबर हमलों से आम नागरिकों और आवश्यक सेवाओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए। प्रतिनिधियों ने वर्ष 2015 में यूक्रेन के बिजली ग्रिड पर हुए साइबर हमले का उदाहरण लेते हुए समझा कि डिजिटल प्रणालियों पर हमले किस तरह बड़े स्तर पर नागरिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
विद्यार्थियों ने तीन प्रमुख सवालों पर विचार किया। पहला, क्या जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे को मिलने वाली सुरक्षा साइबर हमलों पर भी लागू होती है? दूसरा, जब किसी साइबर हमले के स्रोत की पुष्टि करना कठिन हो, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय कार्रवाई कैसे करे? तीसरा, अस्पतालों, बिजली ग्रिड और जल प्रणालियों को साइबर हमलों से बचाने के लिए कौन से नियम बनाए जाने चाहिए?
UNSC की भूमिका और भारत की स्थिति को समझा
समिति के अध्यक्ष अर्पित जकारिया ने विद्यार्थियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना, उसके पांच स्थायी सदस्यों के वीटो अधिकार और दस निर्वाचित सदस्यों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण है, हालांकि साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर वैश्विक सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
चर्चा के दौरान भारत की वर्ष 2021-22 की सुरक्षा परिषद सदस्यता, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग और स्थायी सदस्यता से जुड़े भारत के रुख पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, शांति स्थापना और सुरक्षित साइबर स्पेस के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों की भूमिका पर चर्चा हुई।
शोध, जनसंचार और नेतृत्व कौशल पर दिया जोर
अर्पित ने प्रतिनिधियों को अपने विचारों और प्रस्तावों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों, जिनेवा कन्वेंशन, साइबर सुरक्षा संबंधी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों और संबंधित देशों के आधिकारिक वक्तव्यों का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने जटिल तकनीकी विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने, तथ्यों के आधार पर तर्क रखने और चर्चा के अंत में व्यावहारिक समाधान सुझाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके अलावा, अलग-अलग विचारधाराओं और देशों के बीच संवाद, सहमति निर्माण तथा साझा प्रस्ताव तैयार करने को प्रभावी कूटनीति का अहम हिस्सा बताया।
'अस्पताल के सर्वर की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी'
सम्मेलन के अध्यक्ष अर्पित जकारिया ने कहा, “साइबर हमले सीमाओं का सम्मान नहीं करते और संघर्ष की स्थिति में इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। इस विषय के माध्यम से मैं प्रतिनिधियों को यह समझाना चाहता था कि अस्पताल के सर्वर की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी उसकी इमारत की सुरक्षा। इस अवसर के लिए मैं IIMUN का आभारी हूं और उन सभी प्रतिनिधियों पर गर्व है, जिन्होंने गहन शोध के साथ अपने विचार रखे।”
साइबर शांति पर युवाओं की भागीदारी
सम्मेलन ने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, साइबर सुरक्षा और मानवीय कानून जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर दिया। तेजी से बदलती तकनीक और संघर्षों में साइबर हमलों की बढ़ती चुनौती के बीच ऐसे मंच युवाओं को वैश्विक मुद्दों पर शोध करने, तार्किक विचार रखने और समाधान-आधारित संवाद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
कोरबा में आयोजित इस सम्मेलन के माध्यम से युवाओं ने यह संदेश दिया कि साइबर शांति और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर चर्चा केवल विश्व की बड़ी राजधानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें युवा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
© Sandesh Bharat. All Rights Reserved.
Powered by Tivra Technologies