संदेश भारत रायपुर । छत्तीसगढ़ (सारंगढ़-बिलाईगढ़): - पत्रकार के साथ हुई मारपीट के मामले में शासन-प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन का बयान आया है कि “मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है,”
लेकिन पीड़ित और पत्रकार जगत इस 'उचित' शब्द की परिभाषा ढूँढ रहे हैं।
सच्चाई के सबूत मौजूद, फिर न्याय में देरी क्यों?
घटना 16 अप्रैल की है, जब किसान हित की बात करने गए एक पत्रकार को बंधक बनाकर, गला दबाकर बेरहमी से पीटा गया। यह पूरी वारदात CCTV में कैद है। इसके बावजूद, अब तक की कार्रवाई केवल एक अधिकारी के निलंबन तक ही सीमित रही है।
संदेश भारत के तीखे सवाल:
👉 निलंबन ही क्यों, FIR क्यों नहीं? जब साक्ष्य (CCTV) स्पष्ट हैं, तो दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने में हिचकिचाहट क्यों?
👉 दूसरे अधिकारी पर मौन क्यों? घटना के वक्त मौजूद दूसरे जिम्मेदार अधिकारी, जिनकी भूमिका संदिग्ध है, उन पर अब तक गाज क्यों नहीं गिरी?
👉 क्या 'देखना होगा' ही जवाब है? क्या सिस्टम सिर्फ समय काटने के लिए जांच का आश्वासन दे रहा है?
जब सबूत साफ हैं, तो कार्रवाई आधी-अधूरी क्यों? क्या प्रशासन पत्रकार की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है या न्याय करने का साहस दिखाएगा?
सिस्टम की परीक्षा जारी है...
यह मामला सिर्फ एक पत्रकार की मारपीट का नहीं है, बल्कि यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही की अग्निपरीक्षा है। पूरा प्रदेश देख रहा है कि क्या कानून अपना काम करेगा या रसूखदार अधिकारी फाइलों में सच को दफन कर देंगे।
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