अमित बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से आए बाहर: कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत, 3 महीने तक रायपुर जिले में एंट्री पर बैन

अमित बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से आए बाहर: कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत, 3 महीने तक रायपुर जिले में एंट्री पर बैन

अमित बघेल को 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। हालांकि, अदालत ने जमानत की शर्तों को लेकर एक कड़ा निर्देश जारी किया है:

अदालत की शर्त: रिहाई के बाद अमित बघेल को अगले 3 महीने तक रायपुर जिले की सीमाओं से बाहर रहना होगा।

संदेश भारत रायपुर।  छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के अध्यक्ष और 'जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी' के सुप्रीमो अमित बघेल बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। बलौदाबाजार कलेक्टोरेट में हुई हिंसा के मामले में वे पिछले कई महीनों से जेल में बंद थे।

अमित बघेल की रिहाई के बाद रायपुर जेल के बाहर उनके समर्थकों का जमावड़ा देखने को मिला। रिहाई की खबर से कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया।

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन रखी गई ये शर्त

अमित बघेल को 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। हालांकि, अदालत ने जमानत की शर्तों को लेकर एक कड़ा निर्देश जारी किया है:

अदालत की शर्त: रिहाई के बाद अमित बघेल को अगले 3 महीने तक रायपुर जिले की सीमाओं से बाहर रहना होगा।

HIGHLIGHTS 

  1. रायपुर में रैली: रिहाई के तुरंत बाद समर्थकों ने सेंट्रल जेल से रायपुर के प्रसिद्ध घड़ी चौक तक एक भव्य रैली निकाली।
  2. दिग्गज नेताओं की मौजूदगी: इस रैली में 'छत्तीसगढ़ क्रांति सेना' और 'जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी' के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।

क्या है पूरा बलौदाबाजार हिंसा मामला?

  1. यह पूरा विवाद अमरगुफा (गिरौधपुरी) में जैतखाम में हुई तोड़फोड़ की घटना से शुरू हुआ था, जिसके विरोध में उग्र आंदोलन आयोजित किया गया था:
  2. विरोध प्रदर्शन (10 जून 2024): बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में सर्व समाज और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में भीड़ जुटी थी।
  3. भड़काऊ भाषण के आरोप: आरोप है कि छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने मंच से भड़काऊ बयानबाजी की, जिससे भीड़ बेकाबू और उग्र हो गई।
  4. कलेक्टोरेट-एसपी दफ्तर में तोड़फोड़ व आगजनी: उग्र भीड़ ने सुरक्षा घेरे (बैरिकेड्स) तोड़ दिए और कलेक्टोरेट परिसर में प्रवेश कर भारी तोड़फोड़ की। सैकड़ों गाड़ियों को फूंक दिया गया और पूरी कलेक्टोरेट बिल्डिंग को आग के हवाले कर दिया गया।
  5. पुलिसबल पर हमला: स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर पत्थरों, लाठियों व लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।

Author heeralal
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